आयुक्त ने की लोक शिकायत पर सुनवाई

 *लोक शिकायत के तहत 21 मामलों की हुई सुनवाई*

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गया : लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 के तहत प्रथम अपील में आयुक्त मगध प्रमंडल गया श्री असंगवा चुबा आओ द्वारा 21 मामलों में सुनवाई कार्यालय प्रकोष्ठ में की गई। सुनवाई के क्रम में 09 मामलों का निष्पादन *ऑन द स्पॉट* किया गया।

सुनवाई के क्रम में जिला कल्याण पदाधिकारी गया, जिला परिवहन पदाधिकारी गया, कार्यपालक अभियंता वुडको पीआईयू गया एवं जिला गव्य पदाधिकारी गया द्वारा लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम की सुनवाई में लगातार अनुपस्थित पाए जा रहे हैं। न तो इनके द्वारा प्रतिवेदन समर्पित किया जा रहा है और न ही स्वयं अथवा प्रतिनिधि के माध्यम से पक्ष रखा जाता है। नोटिस एवं फोन कॉल के बावजूद भी प्रथम अपीलीय प्राधिकार सह आयुक्त मगध प्रमंडल के पास उपस्थित होकर अपना पक्ष नहीं रख रहे हैं। आयुक्त ने बताया कि जिला कल्याण पदाधिकारी एवं जिला गव्य पदाधिकारी कई सुनवाई में लगातार अनुपस्थित थे। इन सभी पदाधिकारी को विधिवत समन जारी करने का आदेश दिया गया है। अनुमंडल पदाधिकारी सदर गया को विधिवत नोटिस तमिला कराते हुए इनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

  छात्रवृत्ति,  पोशाक एवं मध्याह्न भोजन इत्यादि से संबंधित अपील दायर की गई। अपीलार्थी श्री सिकंदर पासवान, उमल रसूल खाँ एवं श्री बिट्टू लाल रजक के मामले में आयुक्त ने बताया कि शिक्षा पदाधिकारी द्वारा की जा रही टालमटोल के आलोक में दो डीपीओ को संयुक्त रूप से मामले की जांच करते हुए, संयुक्त जांच प्रतिवेदन जिला शिक्षा पदाधिकारी गया के माध्यम से जिसमें जिला शिक्षा पदाधिकारी का स्पष्ट मंतव्य भी शामिल हो, समुचित प्रतिवेदन समर्पित करने हेतु निर्देश दिया गया है। उक्त मामले में दोषी पाए जाने वाले पदाधिकारी/ कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई करने का आदेश दिया गया।

    अपीलार्थी श्री कैलाश दास का मामला ग्राम अचुकी एवं कल्याणपुर को सड़क मार्ग से नहीं जोड़े जाने के संबंध में अपील दायर किया गया था। सुनवाई के क्रम में कार्यपालक अभियंता ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल टिकारी द्वारा बताया गया कि उक्त पथ में टेंडर का कार्य चल रहा है 1 से 2 माह के अंदर उक्त सड़क का निर्माण पूर्ण करा दिया जाएगा।

   अपीलार्थी श्री कांति देवी का मामला आधार लिंक कराने के बहाने खाता से ₹51000 की अवैध निकासी की जाने के संबंध में अपील दायर किया गया था। सुनवाई के दौरान बताया गया कि ₹51000 सीएसपी संचालक द्वारा अवैध निकासी किया गया था। उक्त मामले में साइबर सेल से जांच कराते हुए आयुक्त द्वारा उक्त मामले में अपीलार्थी को राशि वापस ब्याज सहित दिलाई गई।

➖AnjNewsMedia

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