वन महोत्सव का आयोजन

आयुक्त ने कहा वृक्ष स्वच्छ पर्यावरण के लिए वरदान
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गया : अनुग्रह नारायण कॉलेज गया में गया वन प्रमंडल द्वारा 70वां वन महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आयुक्त मगध प्रमंडल पंकज कुमार पाल को प्राचार्य अनुग्रह नारायण मेमोरियल कॉलेज शैलेश कुमार श्रीवास्तव द्वारा पीपल का पौधा प्रदान कर उनका हार्दिक अभिनंदन किया गया। विशिष्ट अतिथि जिलाधिकारी अभिषेक सिंह को रेंज अफसर गुरूपा, जिला वन पदाधिकारी अभिषेक कुमार को रेंज ऑफिसर इमामगंज, नगर पुलिस अधीक्षक मंजीत को बीएड संकाय के शिक्षक मनिक मोहन शुक्ला, नगर आयुक्त सावन कुमार को रेंज ऑफिसर अतरी द्वारा पीपल का पौधा प्रदान कर उनका हार्दिक स्वागत किया गया।
वन महोत्सव का आयोजन Organizing a Van Mahotsav, anjnewsmedia
वन महोत्सव का उद्घाटन
करते आयुक्त श्री पाल, मौजूद डीएम  एवं अतिथि
इस अवसर पर आयुक्त मगध प्रमंडल द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। आयुक्त ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पारिस्थितिकी शास्त्र के अनुसार पर्यावरण संतुलन के लिए कम से कम 33% भूभाग का आच्छादन वनों से आवश्यक है। भारत में 23.8%, बिहार में 16.8% तथा मगध प्रमंडल में 17% भू-भाग वन से अच्छादित है। उन्होंने कहा कि मगध प्रमंडल को वर्ष 2022 तक 20% वन आच्छादित करने का लक्ष्य है। ऐसी योजना वन विभाग द्वारा बनाई गई है। उन्होंने कहा कि हम सभी जानते हैं कि पर्यावरण संतुलन के लिए वृक्ष का होना आवश्यक है लेकिन हम इसपर अमल नहीं करते हैं। कुछ दिनों तक अभियान चलता है, उसके बाद फिर हम अपने अन्य कार्यों में लग जाते हैं। मगध प्रमंडल में 60 लाख पेड़ लगाने का संकल्प है। देखना यह है कि इनमें से कितने पेड़ों को हम बचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि बिना जन सहभागिता के इतने बड़े अभियान का सफल होना संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मनरेगा के माध्यम से 10 लाख, वन विभाग के माध्यम से 8 लाख पौधारोपण किया जाना है। उन्होंने कहा कि वन पोषकों की कमी की वजह से हमारे वृक्ष बच नहीं पाते हैं। इसलिए इस बार उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में आदेश जारी किया गया है कि वन पोषकों का भुगतान तभी होगा जब उनके देखभाल वाले 80% वृक्ष बचे रहेंगे। यदि वृक्षों का प्रतिशत 70 से कम हो गया तो वन पोषकों को सेवा में रहने का कोई अधिकार नहीं होगा।
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गया में धूमधाम से मना वन महोत्सव
उन्होंने कहा कि हम विभिन्न कार्यक्रम करते हैं जिसमें हम उपस्थित होते हैं, वरीय पदाधिकारी, गणमान्य व्यक्ति, शिक्षाविद वृक्ष लगाते हैं। लेकिन वृक्षारोपण के उपरांत कितने लोगों को उन वृक्षों की देखभाल का ख्याल रह जाता है। यह आत्म चिंतन का विषय है। उन्होंने कहा कि वन विभाग की योजना हर परिसर हरा परिसर के अंतर्गत महाविद्यालय में वृक्ष लगाए जा रहे हैं ईनकी सुरक्षा का इंतजाम करने का अनुरोध प्राचार्य से किया गया।
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वन महोत्सव

पर आयुक्त तथा डीएम ने की वृक्षारोपण

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उन्होंने कहा कि गया, औरंगाबाद एवं नवादा में विगत माह में लगभग 140 लोगों की मृत्यु हीट स्ट्रोक के कारण हुई। जब उसकी समीक्षा की गई तो पता चला कि हीट स्ट्रोक का हमला उन्हीं जगहों पर हुआ जहां वन बिल्कुल नहीं था, भूमि 
बंजर पड़ी थी, हरियाली बिल्कुल नहीं थी, सरफेस वाटर नहीं था, ग्राउंड वाटर बहुत नीचे था। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि यह आगे नहीं होगा। इसलिए हमें वनों को बचाना जरूरी है। उन्होंने पटना और उत्तर प्रदेश की तुलना इन क्षेत्रों से करते हुए कहा कि उतना ही तापमान और गर्मी उन दिनों वहां भी थी, लेकिन वन क्षेत्र, सरफेस वाटर, ग्राउंड वाटर लेवल होने के कारण वहां हिट स्ट्रोक नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि उन जगहों पर यह घटना नहीं हुई। गया, नवादा, औरंगाबाद में ही हीट स्ट्रोक क्यों हुआ यह चिंतनीय विषय है। उन्होंने कहा कि बगैर जनभागीदारी के यह पूरा प्रमंडल,यह जिला हरा-भरा नहीं हो सकता है। औरंगाबाद जिले में भी समीक्षा के दौरान कल बताया गया कि 8 लाख पौधे लगाए जा रहे हैं। चिंता का विषय यह है कि कितने पौधे बचाए जाएंगे। उन्होंने जिला वन पदाधिकारी से इस पर लगातार अनुश्रवण करते रहने को कहा। उन्होंने कहा कि मनरेगा के जितने प्रखंड स्तर एवं पंचायत स्तर पर कर्मी है , उनकी भी जिम्मेदारी बनती है कि लगाए गए पौधों की सुरक्षा की जाए नहीं तो इसका कोई लाभ नहीं होगा। क्योंकि वन महोत्सव का आयोजन 1950 से किया जा रहा है लेकिन वन क्षेत्र बढ़ने के बजाय घटता जा रहा है। यह आत्म चिंतन का विषय है। यह शहर के गणमान्य व्यक्तियों को सोचना होगा कि हम किस दिशा में बढ़ रहे हैं उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग है और भू क्षरण बढ़ता जा रहा है और खेती के लिए उपजाऊ मिट्टी की परत लगातार घटती जाती है। क्योंकि जब हवा तेज चलती है तो मिट्टी को पकड़ने के लिए वृक्ष नहीं होते हैं, भूमि लगातार बंजर होते जा रही है। उन्होंने कहा कि हम सभी इन बातों को जानते हैं, जान के भी अनजान बने रहना सबसे बड़ी दुख की बात है। इस जड़त्व से बाहर निकलना होगा और संकल्प लेना होगा कि हम जो भी पौधा लगाएं उसे समय-समय पर उसकी देखभाल एवं चिंता उसी प्रकार करते रहे जिस प्रकार हम अपने बाल-बच्चे एवं सगे संबंधी की चिंता करते हैं। क्योंकि वृक्ष से बढ़कर हमारा कोई मित्र नहीं है।
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वन महोत्सव में शिरकत करते अतिथिगण

इसके पूर्व जिलाधिकारी गया अभिषेक सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि आज का वन महोत्सव का आयोजन केवल सांकेतिक न रहे इसका संदेश गया वासियों तक पहुंच सके तभी यह सफल होगा उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य है कि हम ज्यादा से ज्यादा पौधे लगा सके और इसे बचा सके। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बिहार सरकार द्वारा एक आह्वान किया गया है जल, जीवन और हरियाली के नाम पर। इसमें हम कहते हैं कि जल है तो जीवन है। जीवन चाहे मनुष्य का हो, जानवर का हो या पक्षी का हो सभी कहीं न कहीं वृक्षों पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष हम लोग का प्रयास हैं कि गया में 20 लाख पौधारोपण किया जाए और उनमें गया वासियों के लिए तीन से चार लाख पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया है जिनमें सिविल सोसायटी, प्राइवेट स्कूल और विभिन्न संस्थाओं द्वारा पौधरोपण किया जाना है। उन्होंने कहा कि अक्सर हम तब पिछड़ते हैं जब हम पूरी जिम्मेदारी सरकार, सरकारी व्यवस्था, या किसी खास विभाग पर छोड़ते हैं। हम हमेशा वृक्षारोपण के लिए वन विभाग को देखते हैं। वृक्षारोपण करना है तो वन विभाग करेगा। लेकिन यह हम भूल जाते हैं कि जो प्राकृतिक हवा हम लेते हैं या उसका जो लाभ मिलता है वह सबको बराबर मिलता है। वृक्ष यह नहीं देखता है कि किसने मुझे लगाया ऊंच-नीच, जात-पात, दल, विपक्ष इत्यादि किसी को वह नहीं देखता। इसका लाभ सबों को मिलता है। इतना लाभ किसी कार्य में नहीं मिलेगा जितना पौधा लगाने और बेहतर वातावरण तैयार करने में मिलेगा यह केवल आलोचना करने से नहीं होगा। इसमें जबतक सभी लोगों का सहयोग नहीं होगा, जन आंदोलन नहीं होगा हर व्यक्ति अपने जिम्मेदारी नहीं समझेगा तब तक यह अभियान सफल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि गया की जनसंख्या 52 लाख है। जिसमे गया शहर में 5 लाख लोग रहते हैं। जिला में लगभग 12 से 13 लाख परिवार रहते हैं। हर व्यक्ति परिवार यह मान ले कि हर कोई एक पेड़ लगाएंगे और उसके लिए हम यह नहीं सोचेंगे कि वन विभाग निशुल्क पौधा देगा। उन्होंने कहा कि जब हम अपना घर बनाते हैं तो उसकी सारी व्यवस्था खुद करते हैं, न कि दूसरों के पास जाते हैं। उसी प्रकार वृक्ष को भी हम घर का हिस्सा बना ले। गया जिसे माना गया है कि यहां पर वन कम है वह हम दूर कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह हमें जो वृक्षारोपण का लक्ष्य दिया गया है 20% उसे प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने हीट स्ट्रोक का उदाहरण दिया और अपने व्यवहार में परिवर्तन लाने की अपील की।
उन्होंने जल संचय की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि जिस तरह के समाचार मिल रहे हैं। उससे यह निश्चित है कि यदि जल संचय नहीं होगा तो कुछ शहरों से जल खत्म हो जाएगा और उनमें गया भी शामिल है। उन्होंने सोकपिट बनवाने, घरों में रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग करवाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भूगर्भ में पानी को ले जाने की व्यवस्था करनी होगी। उन्होंने गया वासियों से इस आंदोलन का हिस्सा बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि आप पौधारोपण नहीं कर सकते हैं और आर्थिक मदद करना चाहते हैं तो *हरित गया कोष* में दान दें। प्राचार्य अनुग्रह नारायण मेमोरियल कॉलेज द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया।
इस अवसर पर आयुक्त, जिलाधिकारी एवं नगर आयुक्त नगर निगम द्वारा कॉलेज परिसर में एक-एक पीपल का पौधा, नगर पुलिस अधीक्षक द्वारा मोहगनी का पौधा, जिला वन पदाधिकारी द्वारा छितवन एवं प्राचार्य द्वारा नीम का पौधा लगाया गया।

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