राष्ट्रपति को लिखा पत्र

गया : विश्वप्रसिद्ध सनातन धर्मावलंबियों के पितरो का एकमात्र मोक्षधाम गयाजी के तीर्थ पुरोहितों के अधिकार की रक्षा हेतु महामहिम राष्ट्रपति को लिखा पत्र।

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पत्र में लिखा है कि गयाधाम का पौराणिक एवं धार्मिक महात्म्य है । यहां शेषशायी भगवान विष्णु की अति प्राचीन पवित्र चरण चिह्न है।इसकी ऐसी मान्यता है कि जोभी व्यक्ति यहां आकर अपने कुल के मृतक आत्मा की शांति एवं मोक्ष की कामना से श्रद्धा  पूर्वक पीण्डदान करते हैं उनकी आत्मा को मोक्ष प्राप्त हो जाता है।वैसे तो सालों भर यहां देश और विदेश के लाखो श्रद्धालू यहां दर्शन पूजा श्राद्ध यादि से विभिन्न कामनाओं की पूर्ती हेतु  आते जाते रहते हैं।किंतु  साल में 15 दिन पितृपक्ष का बड़ा भारी महात्म्य है। इस  अवसर पर विशेष पूजा पाठ तर्पण श्राद्ध  पिंडदान यादि कार्यों से देश विदेश के कोने-कोने से तीर्थ यात्रियों की बड़ी भारी लगती भीड़ रहती है। जिस से सरकारी राजस्व मे काफी वृद्धि होती है।

किंतु दुख के साथ कहने को बाद्ध होना पड़ रहा है कि आज विष्णुपद को क्षुद्र  राजनीतिक कारणों से विवादास्पद बनाया जा रहा है ।तीर्थ पुरोहितों की छवि  एक सोची समझी राजनीति   षड्यंत्र के द्वारा धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि पौराणिक काल से विष्णु पद तीर्थ पुरोहितों के अधिकार क्षेत्र में रहा है, विष्णु ने स्वयं विष्णुपद को तीर्थ पुरोहितों को दान स्वरूप भेंट दिया था आज भी इनके द्वारा ही एक समिति बनाकर विष्णुपद का रखरखाव धार्मिक कार्यों का आयोजन संचालन भंडारा यादि सारी कार्य संपन्न किए जाते हैं । क्योंकि विष्णु ,विष्णु पद के विरासत के एकमात्र अधिकारी तीर्थ पुरोहित ही हैं ,यह इनकी  धरोहर है ऐसे में कुछ दुष्ट  प्रवृत्ति के लोग बिहार धार्मिक न्यास बोर्ड से मिलीभगत कर विष्णुपद को पंडो के  अधिकार क्षेत्र से बाहर करने की कोशिश कर रहे हैं ,जो न तो कानूनी दृष्टिकोण से न हीं धार्मिक दृष्टिकोण से न हीं  सामाजिक दृष्टिकोण से उचित जान पड़ता है।

राष्ट्रपति से प्रार्थना किया है कि  व्यक्तिगत दिलचस्पी लेकर  तीर्थ पुरोहितों  को  न्याय दिलाने की कृपा प्रदान कर  तीर्थ पुरोहितों के अधिकारों की रक्षा कर   यश का भागी बने। बिहार के गया जिले के गोल बगीचा से डॉक्टर विवेकानंद मिश्रा, राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय राष्ट्रीय ब्राम्हण महासभा एवं मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान के राष्ट्रीय महासचिव ने इस आशय का ख़त लिखी है।

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