पद त्याग पूर्व डीजीपी बने नेता

 बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर बने नेता। कमर कस के चल दी है नेतागीरी की राह पर। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) के  तहत सेवानिवृत्त लेकर चुनाव लड़ेंगे डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय। वीआरएस की अर्ज़ी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सौंपी है। जो स्वीकार हो गया है। अब पूर्व डीजीपी श्री पांडेय को सैल्यूट नहीं मारना पड़ेगा। सीएम के समक्ष बैठेंगे, नेता के रूप में। चर्चा गर्म रै कि सीएम ने एक डीजीपी को हाई प्रोफ़ाईल के नेता बना दी। वैसे उनकी क्षमता कहाँ थी, नेता बनने की। विकास पुरूष के शह पर यह सब साकार हुआ है। यह सब उन्हीं की महिमा रूपी कृपा है।  क्योंकि एनडीए से टिकट मिलना भी आसान नहीं है। जो पूर्व डीजीपी के लिए सब मुमकिन कर दी है विकास पुरूष नीतीश कुमार। एनडीए का टिकट उनके लिए भेंट स्वरूप अनोखा तोहफ़ा है। जिससे रिटायर डीजीपी के राजनैतिक कैरियर बनेगा। जो होगा डीजीपी के कैरियर से चौगुणा शक्तिशाली। 

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 वह अर्जी स्वीकृत होने पर चुनावी जंग में उतरेंगे आईपीएस पांडेय। पूर्व आयुक्त केपी रमैया की राह पर चल पड़े हैं गुप्तेश्वर। उनका क्या हश्र हुआ दुनिया जानती है। उन्हें सबक़ लेनी चाहिए।

यह भी राजनैतिक चाल हीं है। इस राजनैतिक चाल से पूर्व भी एक चाल चल कर, पूर्व आयुक्त केपी रमैया को भी चुनाव में इसी तर्ज़ पर उतारा गया था। फिर वही चाल को दुहराया गया है। क्योंकि दौलतमंद हैं श्री पांडेय। लॉकडाउन के माहौल में होने वाले चुनाव के लिए दौलत होना अनिवार्य है। विकास पुरूष नीतीश कुमार की ऐसी अनोखी रणनीति चलती रहती है। ताकी कमाई हुई मोटी रक़म हल्की हो सके। ना जानूँ , अबकी बार केपी रमैया को एनडीए में श्री कुमार क्यों नहीं स्थान दिए, यह गंभीर सोचनीय विषय है। इस बार रमैया को फटकार कर, डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को एनडीए में स्थान सुरक्षित किया गया है। 

अब जनता, पहले जैसा भोली- भाली नहीं रही। जनता चालाक हो चुकी है। वोट बहुत सोच समझ कर डालती है। क्योंकि वोट ! चुनाव के लिए बहुमूल्य रत्न है। जिससे सीधे सत्ता हासिल होती है। अब चुनाव ग़रीबों का नहीं, दौलतमंदों में जा सिमटी है। 

सत्ता की गलियारा की माहौल बदल चुकी है। युवा पीढ़ी वालों को राजनीति में भीगेदारी नहीं मिल रही है। जबकि इसके विपरीत रिटायरमेंट वाले बुज़ुर्गों को राजनीति में खास तौर पर स्थान दिया जा रहा है। इक्के- दुक्के युवा राजनीति में शामिल हैं, वो भी विरासत में मिली हुई स्थान है। आख़िर, श्री पांडेय दिग्गज आईपीएस अधिकारी रहे। भला, वे भी राजनीति के चक्कर में पड़ गए। सुर्ख़ियों है कि विकास पुरूष की हीं यह हाई प्रोफ़ाईल चाल है। जिसमें फँसे हैं डीजीपी पांडेय। क्योंकि विकास पुरूष नीतीश के वगैर एक पत्ता भी नहीं डोलता, डीजीपी कैसे डोल जाते। उनकी हिम्मत चुनाव लड़ने की नहीं, उन्हें प्राथमिकता देकर, विकास पुरूष एनडीए में चुनावी स्थान दिए हैं। वैसे, आई पीएम की औक़ात कहाँ थी, एनडीए से चुनाव लड़ने की। यह चाल है, उत्थान पुरूष नीतीश कुमार की नीति की। क्योंकि उनके मर्ज़ी के वगैर, यह खेल संभव नहीं था। क्योंकि वीआरएस कोई लड़क खुशखुश का खेल नहीं।

डीजीपी का पद त्याग कर अब हाथ जोड़ वोट माँगने निकल पड़े हैं पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर। क़ानून की डंडा से चलने वाले अब ग्रामीणों से वोट माँगते फिरेंगे। अब श्री पांडेय का दिन बदल गया। नेता के लूक में हैं, पूर्व डीजीपी श्री पांडेय। वर्दी का रौब दिखाने वाले पुलिस अफ्सर, अब जनता से वोट माँगेंगे। वे अब नेतागीरी में उतर चुके हैं। वर्दी त्याग, वे राजनीति में कदम रखे हैं। देखना है यह कदम कितना फलता- फूलता है।

➖AnjNewsMedia➖

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