किसानों की आय दोगुनी करेगा बैंक

गया : पंजाब नेशनल बैंक के राय काशीनाथ मोड़ के पास स्थित मंडल कार्यालय में किसानों की आय को दोगुना करने के उद्देश्य से सर्कल हेड सुबोध कुमार की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कृषि एवं संबंद्ध विभाग के पदाधिकारियों की बैठक आहूत की गई। जिला अग्रणी प्रबन्धक यशवंत शंकर, परियोजना निदेशक, आत्मा रवीन्द्र कुमार, मगध डेयरी के महाप्रबन्धक के॰पी॰एस॰ यादव, जिला पशुपालन पदाधिकारी डा॰ अनिल कुमार, सहायक निदेषक, उद्यान शषांक कुमार, गव्य विकास के क्षेत्र पदाधिकारी अनिल कुमार, जीविका के शिवा एवं गौरीशंकर सिंह, सहायक कुक्कुट पदाधिकारी डा॰ रौशन कुमार, उप परियोजना निदेशक, आत्मा नीरज कुमार वर्मा, मुख्य प्रबंधक संजीब कुमार दास एवं योजना के प्रभारी पदाधिकारी बी॰पी॰गुप्ता ने भागीदारी किया। 

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बैठक में सर्कल हेड ने कहा कि बैंक कृषि क्षेत्र की परियोजनाओं के लिये बहुत ही आसान शर्तो पर ऋण मुहैया कराने को तत्पर हैं। 03 लाख रुपये के नीचे के ऋण स्वीकृत करने की शक्ति सभी बैंक शाखाओं के पास है। 03 लाख रुपये से ऊपर की परियोजनाओं के ऋण को काषीनाथ मोड के पास स्थित रिटेल एग्रीकल्चर एमएसएमई के ऋण स्वीकृत करने के कार्यालय से स्वीकृति दी जाती है। 

किसानों की आय को दोगुना करने के लिये बैंकों से सहायता दिलाने के लिये बैंक द्वारा किसानों को उपलब्ध कराये जाने वाली सुविधाओं की जानकारी देते हुये योजना के प्रभारी पदाधिकारी श्री बी॰पी॰ गुप्ता ने बताया कि बैंक ऐसे व्यक्ति जिनके पास खेती करने के लिये जमीन नहीं है उन्हें जमीन खरीदने के लिये भी ऋण देते हैं। बैंकों के पास बैंकेबल और वायबल प्रोजेक्ट के साथ ऋण के लिये आवेदन करने पर बैंक निष्चित ही सहायता उपलब्ध करायेंगे। 

जिला अग्रणी प्रबन्धक ने एग्री इन्फ्रा फंड अन्तर्गत 02 करोड़ तक के ऋण पर ब्याज की दर में छूट, गया में मधुमक्खीपालन से शहद उत्पादन, मशरुम उत्पादन एवं पपीता के कलस्टर बनाकर समूह में खेती कराने तथा किसान उत्पादक संगठन का गठन करने की जानकारी दिया। 

जिला पशुपालन पदाधिकारी ने बकरीपालन एवं मुर्गीपालन (लेयर एवं ब्रायलर) की योजनाओं से लाभ लेने के तरीके एवं बैंकों की भूमिका के बारे में बताया। डेयरी फिल्ड आफिसर ने 02, 04, 06 एवं 10 दुधारु पशुओं की डेयरी की योजना का लाभ लेने के लिये सरकार द्वारा दिये जा रही सहायता के बारे में बताया। जिविका के पदाधिकारियों ने जिले में गठित 43000 स्वयं सहायता समूहों को बैंकों से हो रहे लाभ की जानकारी दिया। 

परियोजना निदेषक, आत्मा ने बताया कि आत्मा के माध्यम से 1100 से अधिक समूह को गठित किया गया है। इन समूह के सदस्यों को जैविक खेती, औषधीय एवं सगन्धीय पौधों की खेती, मशरुम उत्पादन, फूलों की खेती, मधुमक्खीपालन, मुर्गीपालन, बकरीपालन, गौपालन, मछलीपालन जैसे व्यवसाय के लिये प्रषिक्षित किया गया है, समूहों के ज्यादातर सदस्य पूंजी के अभाव में इन कार्यो को विस्तार नहीं कर पा रहें है बैंक उनको सहयोग करे तो अवश्य इन किसानों की आय बढे़गी।

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