संस्कृति की जीवंतता का अर्थ भाषा से जुड़ाव: आयुक्त अंशुल
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| आयुक्त अंशुल अग्रवाल |
नव नालंदा महाविहार के संस्कृत महोत्सव कार्यक्रम में आयुक्त अंशुल अग्रवाल ने कहा कि साहित्य व संस्कृति के जीवन्त होने का अर्थ है- भाषा से जुड़ाव होना। भाषा व साहित्य की प्रतियोगिताएं हमें उत्साह देती हैं। संस्कृत में पुराना साहित्य है। संस्कृत तार्किकता व वैज्ञानिकता देती है। प्राचीनता के साथ ही साथ, देश के नये माइंडसेट को भी संस्कृत विकसित करती है।
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| AnjNewsMedia |
नव नालंदा महाविहार, नालंदा में त्रिदिवसीय संस्कृत महोत्सव का आयोजन किया गया। श्रावण पूर्णिमा के शुभ दिन को संस्कृत दिवस के रूप में मनाया जाता है। नव नालंदा महाविहार के इस कार्यक्रम में आशु भाषण, सस्वर पद्य पाठ, संस्कृत गीत गायन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
समापन समारोह की अध्यक्षता कुलपति प्रो वैद्यनाथ लाभ ने की। मुख्य अतिथि नालंदा के नगर आयुक्त अंशुल अग्रवाल तथा विशिष्ट अतिथि डॉ नीहारिका लाभ थे।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो वैद्यनाथ लाभ ने कहा कि श्वेन्त्सांग के प्रयासों से प्राचीन नालंदा महाविहार की ज्ञान-छवि विश्व में पहुँची। संस्कृत, पालि, प्राकृत, अपभ्रंश भाषाओं के साहित्य के आधार पर प्राचीन नालंदा की ज्ञान- परम्परा के गौरव को हम और आगे बढ़ाएँगे। प्राचीन नालंदा महाविहार के हम उत्तराधिकारी हैं।
इस अवसर पर संस्कृत व पालि के विद्वान डॉ उमा शंकर व्यास जी को अशोक चिह्न व शॉल से सम्मानित किया गया। सेवा चेतना पत्रिका का लोकार्पण भी इस अवसर पर किया गया।
धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रूबी कुमारी तथा संचालन डॉ नरेंद्र दत्त तिवारी ने किया।
प्रारंभ में मुख्य अतिथि, कुलपति महोदय तथा विशिष्ट अतिथि तथा अन्य विशिष्ट जनों द्वारा दीप- प्रज्ज्वलन, भिक्षु धम्म ज्योति द्वारा मंगल पाठ एवं कुंदन कुमार तथा आनंद कुमार द्वारा वैदिक मंगलाचरण किया गया।
संस्कृत-भाषण-प्रतियोगिता
प्रथम-कुन्दन कुमार, संस्कृत, ननाम
द्वितीय-अर्चना वर्मा, मिराण्डा हाउस, दिल्ली
तृतीय-उत्कर्षा रंजन, सरस्वती विद्या मंदिर, राजगीर
सांत्वना पुरस्कार-अंजलि कुमारी, मघड़ा
संस्कृत-गीत-प्रतियोगिता
प्रथम-श्री कौशल कुमार, संस्कृत, ननाम
द्वितीय-श्री धनंजय कुमार, संस्कृत, ननाम
तृतीय-सुश्री राखी कुमारी, मघड़ा
सस्वर-पद्य-पाठ
प्रथम-सुलोचना कुमारी वर्मा, संस्कृत, ननाम
द्वितीय- आकर्ष गुप्ता, सरस्वती विद्या मंदिर, राजगीर
तृतीय-ब्रजेश कुमार, संस्कृत, ननाम
इस कार्यक्रम में नव नालन्दा महाविहार सम विश्वविद्यालय के आचार्य, कुलसचिव डॉ सुनील प्रसाद सिन्हा, गैर शैक्षणिक सदस्य, छात्र, अन्य अभ्यागत तथा संस्कृत प्रेमी उपस्थित थे।




