NavNalandaMahaVihar: धूमधाम से मना संस्कृत महोत्सव

संस्कृत की प्रतिष्ठा सदैव विद्यमान: प्रो. कर्ण

धूमधाम से मना संस्कृत दिवस

संस्कृत महोत्सव का समापन आज

समापन समारोह का मुख्य अतिथि होंगे नालंदा के डीएम योगेंद्र सिंह

नालंदा: दुनिया चाहे जितनी भी बदल गई है परंतु संस्कृत का प्रभाव हमारे जीवन में रचा-बसा है। जन्म से लेकर मृत्यु तक के सभी 16 संस्कारों में संस्कृत का उपयोग होता है।

NavNalandaMahaVihar: धूमधाम से मना संस्कृत महोत्सव, Influence of Sanskrit in life, AnjNewsMedia
नव नालंदा महाविहार में धूमधाम से मना
संस्कृत महोत्सव

उक्त बातें नव नालंदा महाविहार में आयोजित संस्कृत महोत्सव के प्रथम दिन महाविहार के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विजय कर्ण ने कही। प्रोफेसर  कर्ण ने कहा कि इस विश्व में जो कुछ भी शुद्ध, परिष्कृत व मूल स्वभाव में विद्यमान है उन सभी में संस्कृत का प्रभाव देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि श्रावणी पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला यह संस्कृत दिवस कई मायने में महत्वपूर्ण है यह दिन विद्या के प्रारंभ करने का दिन है अतः इसे उपाकर्म कहते हैं।

विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए दर्शन विभाग के प्रोफेसर सुशील दुबे ने कहा कि यह संस्कृत भाषा चिर नवीना है यह प्राचीन भाषा होने के साथ-ही यह आधुनिक भारतीय भाषा है। इस भाषा की स्वीकृति पूरे विश्व में है क्योंकि यह पूर्ण भाषा है। संगोष्ठी में डॉक्टर दीपंकर लामा ने अपने उद्बोधन में संस्कृत भाषा की मधुर गीता के बारे में बताया कि इस भाषा के उच्चारण मात्र से रोमांच होता है और शरीर मन पुलकित हो जाता है।प्रस्तुत आयोजन के उद्घाटन सत्र में महाविहार के परास्नातक के छात्र-छात्राओं- बृजेश कुमार, रूपम कुमारी, धनंजय कुमार, सुलोचना कुमारी वर्मा, बिन्नी कुमारी, सोनू कुमार पांडे और कौशल कुमार ने सुस्वर में संस्कृत गीतों का गायन किया।

संस्कृत महोत्सव के दूसरे दिन संस्कृति श्लोक प्रतियोगिता में 23 प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुति दी। इसके अलावा संस्कृत गीत प्रतियोगिता में 20 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया तथा संस्कृत भाषण प्रतियोगिता जिसका विषय भारतभूमि:  स्वर्गादपि गरीयसि था में 15 विद्यार्थियों ने भाग लिया।

इन तीनों प्रतियोगिताओं में महाविहार में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के अलावा विद्यामन्दिर हसनपुर राजगीर के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभागिता की। विशेष रूप से नालंदा जिले का मघड़ा गांव के छात्र भी इस प्रतियोगिता में बढ़ चढ़कर भाग लिया।

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संस्कृत महोत्सव में प्रोफेसर विजय कर्ण

उल्लेखनीय है कि मघड़ा गांव को प्रोफेसर विजय कर्ण द्वारा गोद लेकर उस गांव के बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य किया जा रहा है। इसी श्रृंखला में मघड़ा गांव के 10 प्रतिभागियों ने तीनों प्रतियोगिताओं में प्रतिभागिता की।

इन प्रतियोगिताओं में निर्णायक के रूप में डॉक्टर रूबी कुमारी, डॉक्टर नरेंद्र दत्त तिवारी, डॉ. राजेश कुमार मिश्र प्रोफेसर सुशील दुबे ने कार्य किया। डॉक्टर रूबी कुमारी ने विद्यार्थियों को प्रतियोगिता में अच्छे प्रदर्शन के तरकीब बताएं और डॉक्टर नरेंद्र दत्त तिवारी ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद किया।

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संस्कृत महोत्सव का समापन आज दिनांक 24 अगस्त 2021 को अपराह्न 3:00 बजे से महाविहार के कुलपति प्रोफेसर वैद्यनाथ लाभ की अध्यक्षता में संपन्न होगा। जिसमें मुख्य अतिथि के रुप में नालंदा के जिलाधिकारी श्री योगेंद्र सिंह के द्वारा श्रेष्ठ तीन- तीन प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

आयोजित कार्यक्रम महाविहार के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विजय कर्ण के संयोजकत्व में होगा संपन्न।

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